पार्टी की उपेक्षा से नाराज भाजपा नेता प्रेमचंद्र मिश्रा बीजपुर सीट पर निर्दल प्रार्थी के रूप में खड़े हुए। उनका आरोप है कि वर्ष 2011, 2016, एवं 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजपुर सीट से भाजपा का जो भी प्रार्थी खड़ा हुआ। आगे चलकर वह तृणमूल में शामिल हो गया। जबकि वह मैदान में डटकर तृणमूल का मुकाबला करते रहे। फिर उनकी उपेक्षा क्यों ?
प्रेमचंद मिश्रा की इलेक्शन एजेंट तथा उनकी बेटी ने बताया कि 2022 के नगर पालिका चुनाव में भाजपा की टिकट से तृणमूल के खिलाफ प्रतिद्वंदिता की थी। विपक्ष के भारी दबाव के बावजूद मैदान से नहीं हटी। फिर उनके पिता की उपेक्षा क्यों की गई?







