राज्य सरकार ने बर्थ और डेथ सर्टिफिकेट जारी करने के जनप्रतिनिधियों के अधिकार को वापस ले लिया है। नतीजा कोई भी पंचायत अथवा नगर पालिका प्रधान अब जन्म और मृत्यु सर्टिफिकेट जारी नहीं कर सकेंगे। अब से यह काम केवल सरकारी अधिकारी करेंगे। दरअसल, राज्य सरकार ने साल 1997 से पंचायत और साल 2000 से नगर पालिकाओं के माध्यम से जारी की गई जन्म-मृत्यु सर्टिफिकेट की जांच का आदेश दिया है। उस मुताबिक स्थानीय पुलिस ने विभिन्न नगर पालिकाओं में जाकर रिकॉर्ड की जांच की। सरकार के अनुसार देरी से बनी 46,948 बर्थ सर्टिफिकेट में से 11,390 सर्टिफिकेट फर्जी है। वहीं डिजिटल किए गए 11लाख 24 हजार प्रमाण पत्र में 1 लाख 80 हजार संदिग्ध है।