सत्ता में आई राजनीतिक पार्टियां राजनीतिक वर्चस्व और ब्रांडिंग के लिए अपने पार्टी के झंडे के रंग का इस्तेमाल सार्वजनिक कार्यों में करती है। यह प्रचार है ताकि जनता को पता चल सके कि किसकी सरकार है। माकपा के जमाने में बंगाल के बसों का रंग लाल, तृणमूल के जमाने में सफेद नील था। अब भगवा रंग की सरकारी बसे सड़कों पर उतरने वाली है। इस बारे में राज्य के परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह ने कहा कि लाल खतरे का तो सफेद नील चोरी का चिन्ह है। जबकि भगवा रंग त्याग का प्रतीक है। आलम यह है कि अब एप्पल कंपनी भी भगवा रंग की मोबाइल बेचने लगी है।